Wednesday, August 14, 2019

धागे का हक़दार


                
 धागे का हक़दार





   पेड़ सरसरा रहे थे, कलकल बहती हुई नदी के साथ हवाएँ भी अपना रस घोल रही थी।

वहीं नदी किनारे कोई बैठा था, एक लड़का एक लड़की, वह भाई बहन थे, दोनों अपनी ज़िंदगी को कहीं दूर ले जाते हुए, अपने भविष्य की कल्पनाओं में थे, इस मौसम के साथ, जीवन की उन अनगिनत गणनाओ को लेकर जो अभी शुरू भी नहीं हुआ था।

हम जीवन में चाहे उम्र के किसी भी पढ़ाव पर हों, सपने हमें हमेशा नई उड़ान देते है..’

बातों बातों में वे नदी के दूसरे छोर तक जाने की बातें करते, कभी यहाँ तो कभी वहाँ..

 भाई कहता मैं इस नदी को उड़ कर पार कर लूँगा, पर बहन कहती हैमैं तो नीचे से ही जाना चाहती हूँ, तैरकर।’

भाई - क्यों तुम्हें आसमान में उड़ना पसंद नहीं है?

बहन  - पसंद तो है, मैं भी आसमान में पंछियों की तरह उड़ना चाहती हूँ।

भाई - तुम डरती हो

बहन  - नहीं, में किसी से नहीं डरती। 

भाई - तो फिर.. 

बहन - बस एक ही बात है!! 

हाँ बोलो.. तुम्हें डर लगता है न.. बोल न.... भाई बोला 

बहन कुछ धीरे से बोली, ‘मैं तुम्हें खोने से डरती हूँ

भाई - मुझे ?

बहनउड़ते समय अगर  तुम्हारा balance बिगड़ गया तो... यह कहते कहते रुक गई .. उसकी आँखों में नमी थी... 

भाई- क्या  हुआ.. तू रो रही है... बोल तू रो रही है न... 

बहन- तुम मेरे भाई से बढ़कर दोस्त हो, इसलिए मैं तुम्हें खोना नहीं चाहती। 

भाई - मैं भी तुम्हें कभी खोना नहीं चाहता, चल ठीक है हम नदी तैरकर ही पार करेंगे, अब ठीक है। 

कहते कहते उसकी नज़र बहन के हाथ पर गई, उसने अपनी मुट्ठी में कुछ छुपाकर रखा था, वह देखते हुए फट से बोल पड़ा...ये तुम्हारे हाथ में क्या है? दिखा... दिखा न.. 

बहन ने कुछ फटाफट अपने दोनों हाथों में छुपा लिया. 

भाई ने उसके हाथों से लगभग वो चीज़ छिन ली, फिर वह कहने लगा, “राखीअरे ये कब लाई ? राखी हाथ में लेते हुए अपनी बहन के गले लग गया..

बहन- कल पापा के साथ गई थी तभी ले आई। 

भाई- अब ऐ राखी मैं तुम्हें बाँधूँगा। 

बहन हंसते हुए - ‘तुम मुझे राखी बाँधोगे ..’ 

भाई - अरे हस मत.. मम्मी कहती है, “जो तुम्हारी रक्षा करे वही इस धागे का हक़दार है।” 

बहन- मैंने तुम्हारी रक्षा कब की

भाई- अभी अभी कुछ देर पहले ही तो तुमने मेरी जान बचाई, चल हाथ आगे कर.. 

बहन हाथ आगे करती है और भाई उसे राखी बाँधता है,तभी भाई के जेब से भारत का झंडा गिर जाता है

भारत का झंडा नीचे गिरता देख, भाई बहन दोनों उसे उठाने के लिए झुकते है, दोनों एक साथ झंडा उठाकर salute करते है। उनके पापा फौज में जो हैं, एक सैनिक का ख़ून जो दौड़ रहा था रगों में... 

फिर दोनों वहाँ से निकल पड़े अपने भविष्य की कल्पना में...




—- Yogita Warde

Pal tum thehar Jao

धागे का हक़दार

                   धागे का हक़दार    पेड़ सरसरा रहे थे , कलकल बहती हुई नदी के साथ हवाएँ भी अपना रस घोल रही थी। वहीं नदी...