Friday, May 10, 2019

मौन ही शुरुआत है



                                             

                                       मौन ही शुरुआत है





                 मौन रहना भीतर की सारी आवाज़ों को दबाना है, इसका मतलब यह नहीं कि हम मौन रहकर अपने लिए ग़लत कर रहें है, क्या यह संभव है? मौन रहकर दिलों की बातें पढ़ना ? हाँ यह संभव तो है, क्योंकि मौन उन ढेरों बेतुकी बातों की कड़ी है जो बिना किसी मंज़िल तक पहुँचे ख़त्म हो जाएगी जिनका सार नहीं, बस बेतुकी बातें...
मौन रहने से अनचाहें चित्र धुँधले होने लगते है, सभी हवा में उड़ने लगता है ‘धुएं की तरह’, जिसका साया कमज़ोर नहीं करता, धुएं में वो सभी पुराना जो रिश्तों को कमज़ोर बना रहा होता है, यह ‘शुरुआत है अंत नहीं..’
“मौन की आवश्यकता है हर जगह हर किसी को रिश्तों की नींव को मज़बूत करने के लिए.. मौन ही शुरुआत है!!”


--Yogita Warde


Pal tum thehar Jao

धागे का हक़दार

                   धागे का हक़दार    पेड़ सरसरा रहे थे , कलकल बहती हुई नदी के साथ हवाएँ भी अपना रस घोल रही थी। वहीं नदी...