Wednesday, February 13, 2019

एक ख़त प्यार के नाम

       



              एक ख़त प्यार के नाम 



मेरी प्यारी प्रिया,

               तुम कैसी हो? “अच्छी ही होगी।”
         आज "14 February" है। आज का दिन प्यार करने वालों का दिन है। तुम्हें पता है, इसी दिन गुलाब का फूल भी 5रु. से 20रु. हो जाता है।

        तुम्हें शिकायत होगी ना मुझसे कि मैं साल भर में इसी दिन चिट्ठी क्यों लिखता हूँ, क्योंकि मैं साल भर इसी दिन का इंतज़ार करता हूँ, इस सुहाने मौसम की बात ही कुछ और है, ये दिन ना साल के सबसे ख़ूबसूरत दिनों मैं आता है। “चहचहाती ठंड की सिहरन के बीच थोड़ी-थोड़ी गर्मी का एहसास, एक अलग ही माहौल लिए हुए सुबह का होना। ठंडी मीठी हवाएं जो सुकून दिए बिना नहीं जाती। आसमान में बादलों से चित्रों का बनना, बड़ा मोहक लगता
है।”

        मैं साल भर तुम्हारे प्यार के क़िस्से अपनी मुट्ठी में जमा करता हूँ, और इसी दिन तुम्हें इस ख़त में लिख दिया करता हूँ।

        तुम्हें गए हुए आज 20 साल हो गये है, पर मेरे लिए 20 सदियों की तरह रहे ये दिन।अब मुझसे अकेले खाना भी नहीं बनता, रोटियां बनाते समय मेरे हाथ भी जल जाते हैं।तुम्हारे हाथों का स्वाद कहाँ से लाऊँ। वैसे तो में तुम्हें बताना नहीं चाहता था, पर बता रहा हूँ, “मेरा आखरी दांत भी टूट गया है, यह पढ़कर तुम हंसना मत।” और हां लगता है, मेरे चश्मे का नम्बर भी कुछ बढ़ गया है, कुछ कम दिखने लगा है अब।

प्रिया तुम मुझे जल्दी छोड़ कर चली गई, क्यों किया तुमने ऐसा? जब में तुम्हारी ज़ुल्फ़ों से खेला करता था, तब तुम कहा करती थी “तुम ना मेरे बालों से दूर रहो नहीं तो मैं तुम्हें छोड़कर चली जाऊँगी, जब-जब तुमने कहा कि तुम मुझे छोड़कर चली जाओगी, तब तब मेने वो काम कभी नहीं किया, फिर तुमने मुझे क्यों सज़ा दी; “अकेले रहने की।”

प्रिया तुम्हें गुलाब हमेशा से पसंद थे, तुम जब रूठ जाया करती थी, तब मैं तुम्हारे लिए गुलाब के फूल लाया करता था, फिर “तुम मुझे माफ़ अपने होंठों से मेरे गालों को छूकर करती थी।”

प्रिया में भगवान से यही प्रार्थना करता हूँ, कि मुझे जल्दी से तुमसे मिलवा दे पर वो भी हमारे प्यार का इम्तिहान ले रहा है, पर अब समय जल्दी आएगा हमारे मिलने का, मैं तुम पर बहुत ग़ुस्सा करूँगा और सज़ा भी दूँगा।

प्यार कभी ऐसे तो नहीं किया जाता, जैसे “सुबह शुरू हुआ गुलाब के फूल के साथ और शाम को उसके मुरझाने तक ख़त्म भी, प्यार एक दिन का मोहताज भी नहीं होता ना ही उपहारों का, प्यार ता-उम्र का बंधन है, जो जन्मों-जन्मों तक साथ निभाने के लिए, साथ रहने के लिए होता है। प्यार में त्याग, सच्चाई, भरोसे कि नींव को रखना होगा, जिसकी मज़बूती उम्र भर रहे।”


तुम्हारी याद में तुम्हारा
     प्रीतम




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