Monday, January 28, 2019

अंतहीन चित्र


                                                 अंतहीन चित्र


   कुछ चित्रों का चित्रण कागज़ पर नहीं किया जाता| हर चित्र अपने आप में एक कहानी का समावेश लिए होता है| वो कहानियाँ जो गहरी है, उसे समझने के लिए अपने दिलों और दिमाग को खोलना पड़ेगा, उन चित्रों की गहराई नापने के लिए|
   कुछ चित्र दिल और दिमाग पर इतना गहरा असर छोड़ते है कि चित्र, चित्र नहीं रह जाते, “वह ताउम्र टिस बनकर हमारे साथ रहते हैं|”
   कईं चित्रों मैं हम हमारी यादों को बसा कर रखते है, पता है क्यों? क्योंकि वह अनमोल होती है, कईं तरह का वक़्त “अच्छा, बुरा”... उन चित्रों का आकलन भी हम उनके कल होने में, और आज होने में करते है|
   चित्र खींचना मेरी रूचि है, चित्रों को सहेजना मुझे ज्यादा पसंद है| अब इस चित्र को ही देख लो, जब मैने इसे लिया था, तब मुझे इसमें सिर्फ इसकी खूबसूरती ही नजर आई, पर कईं बार इस चित्र को देखने के बाद महसूस हुआ, इस चित्र मैं भी एक कहानी छुपी हुई है, जिसे समझना बाकि था मेरे लिए|
    इस चित्र में यह पहाड़ दिख रहा है, यह सिर्फ अपनी खूबसूरती लिए नहीं है.. यह कुछ कह रहा है.. कुछ समझना बाकी है..
   कभी सोचा है.. यह पहाड़ कितना अकेला है, फिर भी इसको किसी से कोई शिकायत नहीं है, हमारी तरह, क्योंकि हम तो शिकायतों का भंडार है, हम सभी से शिकायतें करते हैं, कभी कभी तो अपने आप को भी नहीं छोड़ते|
   यह अपने सुखों-दुखों में भी खड़ा है, अटलता के साथ, हमारी जिंदगियों की तरह हताश निराश नहीं, कोई असंतुष्टि नहीं, यह ना टूटा हुआ ना बिखरा हुआ, अपनी ही मौज लिए, जीवन को नया राग सुनाते हुए, हर रोज़ सूरज भी करता है इसे सलाम|
   यह बहुत कुछ सिखा रहा है, हमारा सीखना बाकी है, हमारी जिंदगी बड़ी ही खुबसूरत है, क्यों हम इसे फ़िज़ूल खर्च करते हैं, बिना कोशिश किए भी हारते है, फिर रोते बिलखते हैं, क्यों नया करने से डरते है|
   क्यों अपनी जिंदगी को तोड़ते-मरोड़ते हैं, क्यों कल के लिए आज के खुबसूरत दिन को भी नहीं जीते है, हार के डर को फ़ांस बना चुके हैं|
   इसका जवाब हम सबको अपने अंदर ही मिलेगा, इसी सोच में कि कुछ खुलकर करना बाकी है, और वो सिर्फ आज और अभी में है|

__ Yogita Warde
  

  

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