Tuesday, November 27, 2018

तिनके का प्यार




                   तिनके का प्यार 







कुछ सवालों मैं,
उलझी हुई सी जिंदगी?
अक्सर अपना मुकाम ढूंढती हुई,
खड़ी है |
कभी तुम्हारे आगे, कभी तुम्हारे पीछे,
तुम्हारे अक्स अब खत्म हो रहे है,
और मैं भी |
यही कि मैं अब तुम्हारे आगे,  तुम्हारे पीछे,
अपने वजूद को दफना रही  हूँ , "पर नहीं"|
अब तुम्हारे इंतजार को खत्म कर रही हूँ,
"पर नहीं"|
उलझी हुई जिंदगी को और तुम्हारे अक्स को
"पर नहीं"|
अपनी सभी शामों को फिजूल खर्च कर रही हूँ
"पर नहीं"|
अपनी सोच से तुम्हारी सोच तक फासला बना रही हूँ
"पर नहीं"|
तुम्हारे आगे, कभी तुम्हारे पीछे,
खत्म कर रही हूँ , पर यही सोचकर रुक जाती हूँ,
कि जब हम मिलेंगे तो एक तिनके का प्यार,
अगर बचा होगा तो शायद मैं,
बिलकुल तुम्हारे पीछे और तुम्हारे आगे खड़ी रहूँगी...
" उस एक तिनके के प्यार के सहारे "!!

--Yogita Warde 



Pal tum thehar Jao

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