Monday, September 24, 2018

कुदरत का करिश्मा

 
                                               


                     
         कुदरत का करिश्मा  



कुदरत का करिश्मा देखो,
हर जगह,
हमारे आस-पास कितनी ही,
खूबसूरत चीज़ों को बनाया है इसने।
कभी-कभी छोटी चीज़ों को हम देखते ही नहीं,
यां देखना ही नहीं चाहते।
अब इस लाल फूल को ही देख लो,
इन फूलों की अदा निराली है,
इसकी खूबसूरती शब्दों मैं बयां नहीं की जा सकती।
बस इसे निहारकर महसूस की जा सकती है,
इसकी हर पंखुड़ी उन घटाओं की तरह है,
जिसे दूर से हम हमेशा निहार सकते है,
शायद इसे समझना हर किसी के बस की बात नहीं।
ऐसी खूबसूरती को, अपनी आँखों मैं बंद कर,
हमेशा अपने दिल मैं रख सकते है,
इसके मुरझाने से पहले।
मुरझाना शायद मैं तो क्या ये भी कभी नहीं चाहेगा।
पर इसकी खूबसूरती हमेशा बनी रहेगी....
मेरी कविता मैं मेरी होकर।

--- योगिता वार्डे 





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