Tuesday, March 6, 2018

मौन

                                                                 
  

                                     मौन  


                                 
हमेशा दो लोगों के बीच जब मौन जगह ले लेता है,
तब शुरू होता है, आंखों को पड़ने का खेल...

ये जब पूरी तरह जीवन में बस चुका होता है, तब
कई जाकर एहसास होता है की कितने ही साल ,
बिना मतलब की बातें कर खराब कर दिए।

मौन रहकर आंखों से बाते करते करते सुकून की
कोई चरम सीमा नहीं रहतीं।

हम बस खोए रहते है, एक दूसरे से सवालों
के जवाब मांगते हुए...
कुछ ऐसा, कुछ वैसा ,
और भी काईं उलझनों के साथ ।

माथे पर लकीरें बनाकर
एक गहरी चुप्पी लिये।

पर मौन कायम है अभी तक और प्यार भी।
इसमें प्यार खत्म होने की कोई गुंजाइश नहीं होती।

क्योंकि वो दिल से किया गया है, दिमाग से नहीं।
जब वो टूटेगा तो सारे सवाल हवा हो जाने है,
वो सिर्फ दिमाग की कल्पनाएं थी, दिल की नहीं।

— yogita warde

                            



Pal tum thehar Jao

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